Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for दिसम्बर, 2009


कहाँ   मिले  थे  हम,  ये याद क्या दिलाऊँ तुम्हें,
वो  साथ  ऐसा  भी  न  था  की  याद आऊँ तुम्हें.

तेरा  चेहरा  भी  अब  धुंधला  सा याद  आता है,
मैं  डर  रहा  हूँ,   कहीं  भूल  ही  न  जाऊं  तुम्हें.

बिखर  गया  था  वोह  इक  शख्स  तेरे जाने  से,
ज़रा  सी  बात  है  अब  क्या  भला बताऊँ  तुम्हें.

किस तरह गुजरी  है  तेरे रूठ  कर जाने  के बाद,
मिलो   कभी  तो  कहीं   बैठ  कर  सुनाऊँ  तुम्हें.

कहा  तो  है   की  तेरे  बिन  भी  गुज़र  जायेगी,
करूंगा  क्या  जो  कहीं  भूल  ही  न  पाऊँ  तुम्हें.

‘राजीव’  के  घर  का  पता मालूम तो  है लेकिन,
मैं  खुद रकीब  से  क्यों कर भला मिलाऊँ तुम्हें?

Advertisements

Read Full Post »

आज तेरे शहर में..


भीड़  में  तनहा  खड़ा हूँ, आज  तेरे शहर में,
हर कोई  नामेहरबाँ  है  आज  तेरे  शहर में.

कल तलक तो इक खुला मजमून था तेरा शहर,
आज हर  इक  बात में  हैं राज़  तेरे शहर में.

हार कर भी जीत न पाया मैं बाज़ी प्यार की,
मैं  शिकस्ता-पा खड़ा हूँ,  आज तेरे शहर में.

भूख से रोते तड़पते, सिसकते बच्चों को देख,
हर मर्ज़  का है  कहाँ   इलाज़  तेरे शहर  में.

क्या हुआ तेरा हमेशा हसने हंसाने  का फन,
लोग क्यूँ मायूस हैं,
फिर आज
तेरे शहर  में.

Read Full Post »

छोटी सी कविता


प्रेम  को  कर  के  परिमित,
स्वार्थ  की  रौ  में  बहा था,
कर के व्यथित तुमको प्रिये,
संताप  भी मन  में  रहा  है.

न  समझ  पाने  की तुमको,
भूल  भी  की   है   ह्रदय  ने,
तुम्हारी चुप्पी की व्यथा का,
बोझ   भी   मन  ने सहा  है.

अश्रुओं  में  धुल  के,  स्नेह,
अब और उजला हो गया  है,
प्रेम  है   अब  भी  वही  पर,
मन   नहीं  अब   बावरा  है.


Read Full Post »