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Archive for the ‘Hindi poem’ Category

छोटी सी कविता


प्रेम  को  कर  के  परिमित,
स्वार्थ  की  रौ  में  बहा था,
कर के व्यथित तुमको प्रिये,
संताप  भी मन  में  रहा  है.

न  समझ  पाने  की तुमको,
भूल  भी  की   है   ह्रदय  ने,
तुम्हारी चुप्पी की व्यथा का,
बोझ   भी   मन  ने सहा  है.

अश्रुओं  में  धुल  के,  स्नेह,
अब और उजला हो गया  है,
प्रेम  है   अब  भी  वही  पर,
मन   नहीं  अब   बावरा  है.


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